यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के क्या कारण थे तथा भारत में राष्ट्रवाद का विकास कैसे भिन्न था

यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के क्या कारण थे तथा भारत में राष्ट्रवाद का विकास कैसे भिन्न था ?

यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के निम्नांकित कारण थे- (europe me rashtravad)

सामन्तवादी व्यवस्था- सामन्तवादी व्यवस्था के चलते समस्त अधिकार सामन्तों अथवा उच्च वर्ग के हाथों में थे तथा आम जनता की स्थिति अत्यंत शोचनीय थी ।

राष्ट्रीयता की भावना का विकास- पुनर्जागरण के परिणामस्वरूप प्रत्येक देश में राष्ट्रवादी विचारधाराओं का विकास हुआ था, जिससे राष्ट्रवादी आंदोलनों का जन्म हुआ ।

पुनर्जागरण- पुनर्जागरण के परिणामस्वरूप जनता में बौद्धिकता एवं तर्कवादिता का विकास हुआ था और वे बिना तर्क के किसी बात को स्वीकार नहीं करना चाहते थे ।

मध्यम वर्ग का उदय- मध्यम वर्ग का उदय होने से उसने परम्परागत शासन-पद्धति व जनता के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई ।

श्रमिक वर्ग का उदय- औद्योगिक क्रांन्ति के फलस्वरूप श्रमिक वर्ग का उदय हुआ जिसकी स्थिति अत्यन्त दयनीय थी । अत: उनमें धीरे-धीरे आक्रोश बढ़ता गया ।

भारत में राष्ट्रवाद के विकास के पीछे अंग्रेजी साम्राज्यवाद के विरुद्ध असन्तोष, आर्थिक नीति से प्रभावित जनसामान्य, अंग्रेजी शिक्षा का प्रसार और प्रजातीय विभेद की नीति थी । देश में मध्यम वर्ग का उदय हुआ, साथ में साहित्य एवं समाचार-पत्रों ने राष्ट्रवाद को प्रभावित किया तो सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनोंं ने राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया । (europe me rashtravad)

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