हर सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का रूप नहीं लेती कैसे

हर सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का रूप नहीं लेती कैसे ?

यह कोई आवश्यक नहीं है कि सभी सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का आधार होता है । संभवत: दो भिन्न समुदायों के विचार भिन्न हो सकते हैं, परंतु हित समान होगा । उदाहरणार्थ मुंबई में मराठियों के हिंसा का शिकार व्यक्तियों की जातियाँ भिन्न थी, धर्म भिन्न होंगे, लिंग भिन्न हो सकता है, परंतु उनका क्षेत्र एक ही था । वे सभी एक ही क्षेत्र उत्तर भारतीय थे । उनका हित समान था और वे सभी अपने व्यवस्था और पेशा में संलग्न थे । इस कारण हम कह सकते हैं कि हर सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का रूप नहीं हो सकती ।

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