विश्व बाजार के लाभ हानि पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें

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विश्व बाजार के लाभ— विश्व बाजार ने व्यापार और उधोग को तीव्र गति से बढ़ाया । व्यापार और उधोगों के विकास ने पूँजीपति, मजदूर और मध्यम वर्ग नामक तीन शक्तिशाली सामाजिक वर्ग को जन्म दिया । आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था का उदय और विकास इसी के बाद हुआ । भारत जैसे औपनिवेशिक देशों को सीमित मात्रा में हीं सही औधोगिकीकरण और आधुनिकीकरण विश्व बाजार के आलोक में हीं हुआ । विश्व बाजार ने नवीन तकनीकों को सृजित किया जिनमें रेलवे वाष्प इंजन, भाप का जहाज, टेलीग्राफ, बड़े जलप्रपात महत्त्वपूर्ण रहे । इन तकनीकों ने विश्व बाजार और उसके लाभ को कई गुना बढ़ा दिए । शहरीकरण का विस्तार और जनसंख्या में महत्त्वपूर्ण वृद्धि वैश्विक व्यापार का एक बड़ा लाभकारी परिणाम था ।

विश्व बाजार की हानि— विश्व बाजार ने एशिया और अफ्रीका में साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद के साथ एक नये युग को जन्म दिया, साथ-ही-साथ भारत जैसे पुराने उपनिवेशों का शोषण और तीव्र हुआ । उपनिवेशों की अपनी स्थानीय आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था जिसका आधार कृषि और लघु तथा कुटीर उधोग था, नष्ट हो गई । व्यापार में वृद्धि और विश्व अर्थव्यवस्था के साथ निकटता ने औपनिवेशिक लोगों की आजीविका को छीन लिया । औपनिवेशिक देशों में विश्व बाजार ने अकाल, भुखमरी, गरीबी जैसे मानवीय संकटों को भी जन्म दिया ।

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