यूरोपियन समाजवादियों के विचारों का वर्णन करें

यूरोपियन समाजवादियों के विचारों का वर्णन करें

काल्पनिक यूरोपियन समाजवादी➡ समाजवादी विचारधारा की  शुरुआत काल्पनिक समाजवादी विचारधारा के लोगों द्वारा शुरू की गई । सेंट साइमन फ्रांसीसी समाजवाद के असली संस्थापक थे । इन्होंने ‘द न्यू क्रिश्चियनिटी’ का 1825 ई. में अपने समाजवादी विचारों का प्रतिपादन किया । साइमन का विचार था कि समाज का वैज्ञानिक ढंग से पुनर्गठन हो, श्रमिकों के जीवन-स्तर को ऊपर उठाना चाहिए, प्रतियोगिता समाप्त होनी चाहिए, उत्पादन धनी वर्ग के हाथ में नहीं छोड़ना चाहिए बल्कि उसका सावधानी से नियंत्रण किया जाना चाहिए जिससे निर्धन श्रमिकों को लाभ हो सके । उसने घोषित किया, “प्रत्येक को उसकी क्षमता के अनुसार कार्य तथा प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार पुरस्कार मिलना चाहिए ।”

चार्ल्स फुरियेर ने असंख्य निर्धन श्रमिकों की स्थिति में सुधार लाने के लिए सहकारी समुदायों को संगठित करने की योजना बनाई । इस प्रकार, सेंट साइमन और चार्ल्स फुरियेर दोनों यह मानते थे कि मजदूरों का कल्याण तभी संभव है जब पूँजीवादी व्यवस्था द्वारा स्थापित नियंत्रण समाप्त हो जाए । परन्तु, इन दोनों की विचारधारा अव्यावहारिक सिद्ध हुई ।

1840 ई. के बाद लुई ब्लाँ फ्रांस का सबसे प्रभावशाली काल्पनिक समाजवादी विचारक और नेता था । उसने आर्थिक क्षेत्र में वैयक्तिक स्वतंत्रता के सिद्धांत का विरोध किया और राज्य से मजदूर के काम के अधिकार और उस अधिकार की प्राप्ति के लिए ‘राष्ट्रीय कारखानों’ की माँग की । लुई ब्लाँ का विश्वास था कि क्रांतिकारी षड्यंत्र के जरिये सत्ता पर अधिकार कर समाजवाद लाया जा सकता है । लुई ब्लाँ का विश्वास था कि आर्थिक सुधारों को प्रभावकारी बनाने के लिए पहले राजनीतिक सुधार आवश्यक है । लुई ब्लाँ के सुधार कार्यक्रम अधिक व्यावहारिक थे ।

फ्रांस से बाहर ब्रिटेन में रॉबर्ट ओवेन, विलियम थाम्पसन टॉमस हॉडस्किन, जॉन ग्रे जैसे काल्पनिक समाजवादी विचारक थे । इसने स्कॉटलैण्ड के न्यू लूनार्क नामक स्थान पर एक फैक्ट्री की स्थापना की थी । उसने अपनी फैक्ट्री में अनेक सुधार कर अपने मजदूरों की हालत सुधारने का प्रयास किया । उसने मजदूरों के काम के घंटों में कमी की तथा उन्हें उचित वेतन दिया । मजदूरों के लिए साफ-सुथरे मकान बनवाये और आमोद-प्रमोद के केन्द्र स्थापित किये ।

निष्कर्षत:, उपर्युक्त सभी काल्पनिक समाजवादी विचारक आरंभिक चिंतक थे । उन्होंने वर्ग-संघर्ष के बदले वर्ग-समन्वय पर बल दिया जो समाजवाद का आदर्शवादी दृष्टिकोण था । उन्होंने पूँजी और श्रम के बीच के संबंधों की समस्या का निराकरण करने का प्रयास किया । कार्ल मार्क्स ने इनकी विफलता से सबक लिया और वैज्ञानिक समाजवाद की अवधारणा विश्व को दी ।

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