किसानों को वित्त या साख की आवश्यकता क्यों होती है इन्हें किन संस्थाओं से साख या ऋण मिलता है

किसानों को वित्त या साख की आवश्यकता क्यों होती है इन्हें किन संस्थाओं से साख या ऋण मिलता है ?

हमारे देश के किसानों को कृषिकार्यों के लिए कई प्रकार की साख की आवश्यकता होती है । इन्हें खाद, बीज आदि खरीदने, मजदूरी चुकाने तथा ब्याज आदि का भुगतान करने के लिए अल्पकालीन साख की आवश्यकता होती है । इसी प्रकार, उन्हें कृषि-यंत्र, हल-बैल आदि खरीदने तथा कृषि के क्षेत्र में स्थायी सुधार लाने के लिए मध्यकालीन और दीर्घकालीन साख की भी आवश्यकता होती है । भारतीय किसानों को संस्थागत एवं गैर-संस्थागत दो साधनों से साख की प्राप्ति होती है । कृषि वित्त के संस्थागत साधनों में सहकारी साख समितियाँ तथा व्यावसायिक एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक महत्त्वपूर्ण है । ये संस्थाएँ मुख्यतया इनके अल्पकालीन और मध्यकालीन साख की आवश्यकताओं को पूरी करती है । भूमि विकास बैंक इनके लिए दीर्घकालीन साख की व्यवस्था करते हैं । लेकिन, संस्थागत साधनों से प्राप्त होने वाले साख की मात्रा अपर्याप्त होने के कारण किसान अधिकतर निजी साधनों से साख या ऋण लेना पड़ता है जिनमें महाजन, साहूकार आदि प्रमुख हैं ।

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