इटली के एकीकरण में मेजिनी काबूरी और गैरीबाल्डी के योगदानों को बताएँ

इटली के एकीकरण में मेजिनी काबूरी और गैरीबाल्डी के योगदानों को बताएँ

मेजिनी— मेजिनी साहित्यकार, गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था ।

1820 ई. में राष्ट्रवादियों ने एक गुप्त दल ‘कार्बोनरी’ की स्थापना की थी जिसका उद्देश्य छापामार युद्ध द्वारा राजतंत्र को समाप्त कर गणराज्य की स्थापना करना था । कार्बोनरी के असफल होने पर मेजिनी ने अनुभव किया कि इटली का एकीकरण कार्बोनरी की योजना के अनुसार नहीं हो सकता है । 1831 में उसने ‘युवा इटली’ नामक संस्था की स्थापना की जिसने नवीन इटली के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी । ‘युवा शक्ति’ में मेजिनी का अटूट विश्वास था । युवा इटली संस्था का मुख्य उद्देश्य था— इटली की एक्ता एवं स्वतंत्रता की प्राप्ति तथा स्वतंत्रता, समानता और जन-कल्याण के सिद्धांत पर आधारित राज्य की स्थापना करना । मेजिनी के दिमाग में संयुक्त इटली का स्वरूप जितना स्पष्ट और निश्चित था उतना किसी अन्य के दिमाग में नहीं था । मेजिनी संपूर्ण इटली का एकीकरण कर उसे गणराज्य बनाना चाहता था जबकि सार्डिनिया-पिडमौंट का शासक चार्ल्स एल्बर्ट उसके नेतृत्व में सभी प्रांतों का विलय करना चाहता था । इसके अलावे पोप भी इटली को धर्मराज्य बनाने का पक्षधर था । विचारों की टकराहट के कारण इटली के एकीकरण का मार्ग अवरुद्ध हो गया था । कालांतर में आस्ट्रिया ने इटली के कुछ भागों पर आक्रमण किया जिसमें सार्डिनिया का शासक चार्ल्स एल्बर्ट पराजित हुआ । आस्ट्रिया ने इटली में जनवादी आन्दोलन को कुचल दिया, मेजिनी की पुन: हार हुई और वह इटली से पलायन कर गया ।

काउंट काबूर— काबूर एक सफल कूटनीतिज्ञ एवं राष्ट्रवादी था । वास्तव में काबूर के बिना मेजिनी का आदर्शवाद और गैरीबाल्डी की वीरता निरर्थक होती । काबूर ने इन दोनों के विचारों में सामंजस्य स्थापित किया ।

काबूर यह जानता था कि—

(1)- इटली का एकीकरण सार्डिनिया-पिडमौंट के नेतृत्व में ही संभव हो सकता है ।

(2)- एकीकरण के लिए आवश्यक है कि इटली के राज्यों को आस्ट्रिया से मुक्त कराया जाए ।

(3)- आस्ट्रिया से मुक्ति के बिना विदेशी सहायता संभव नही थी । अत:, आस्ट्रिया को पराजित करने के लिए काबूर ने फ्रांस से मित्रता कर ली । 1853-54 ई. के क्रीमिया युद्ध में फ्रांस को मदद किया जिसका प्रत्यक्ष लाभ युद्ध के बाद पेरिस के शांति सम्मेलन में मिला । इस सम्मेलन में फ्रांस और आस्ट्रिया के साथ पिडमौंट को भी बुलाया गया । यह काबूर की सफल कूटनीति का परिणाम था इस सम्मेलन में काबूर ने इटली में आस्ट्रिया के हस्तक्षेप को गैर-कानूनी घोषित किया । काबूर ने इटली की समस्या को पूरे यूरोप की समस्या बना दिया ।

काबूर ने फ्रांस के शासक नेपोलियन-III से एक संधि की जिसमें यह तय किया गया कि—

(1)- फ्रांस आस्ट्रिया के खिलाफ पिडमौंट को सैन्य समर्थन देगा तथा इटली के प्रांत नीस और सेवाय फ्रांस को प्राप्त होगा तथा

(2)- फ्रांस ने काबूर को यह भी आश्वासन दिलाया कि यदि उत्तर और मध्य इटली के राज्यों में जनमत संग्रह के आधार पर पिडमौंट से मिलाया जाता है तो फ्रांस इसका विरोध नहीं करेगा ।

काबूर के इस कार्य की बहुत आलोचना हुई, लेकिन यदि दो प्रांतों को खोकर भी उत्तरी और मध्य इटली का एकीकरण हो जाता तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी । 1859-60 में आस्ट्रिया और पिडमौंट में सीमा संबंधी विवाद के कारण युद्ध शुरू हो गया । इटली ने फ्रांसीसी सेना के समर्थन से आस्ट्रिया को पराजित किया । आस्ट्रिया के अधीन लोम्बार्डी पर पिडमौंट का अधिकार हो गया । नेपोलियन-III इटालियन राष्ट्रवाद से घबराने लगा, अत: वेनेशिया पर विजय प्राप्त करने के बाद नेपोलियन ने अपनी सेना वापस बुला ली । युद्ध से अलग होने के कारण नेपोलियन-III ने आस्ट्रिया और पिडमौंट के बीच मध्यस्थता कराई जो विलाफ्रेंका की संधि के नाम से जाना जाता है । इस संधि के अनुसार लोम्बार्डी पर पिडमौंट का तथा वेनेशिया पर आस्ट्रिया का अधिकार माना गया । लोम्बार्डी पर अधिकार हो जाने के बाद काबूर का उद्देश्य मध्य एवं उत्तरी इटली का एकीकरण करना था । मध्य एवं उत्तरी प्रांतों की जनता पिडमौंट के साथ थी, इसलिए काबूर ने इन प्रांतों में जनमत संग्रह कराकर उसे पिडमौंट के साथ मिला लिया । इस प्रकार 1860-61 तक काबूर ने सिर्फ रोम को छोड़कर उत्तर तथा मध्य प्रांतों (पारमा, मोडेना, टस्कनी, पियाकेन्जा, बोलोग्ना आदि) का एकीकरण हो चुका था तथा इसका शासक विक्टर इमैनुएल को माना गया ।

गैरीबाल्डी— गैरीबाल्डी ने सशस्त्र क्रांति के द्वारा दक्षिणी इटली के प्रांतों का एकीकरण कर वहाँ गणतंत्र की स्थापना करने का प्रयास किया ।

गैरीबाल्डी ने सिसली और नेपल्स पर आक्रमण किया । इन प्रांतों की अधिकांश जनता बूर्बों राजवंश के निरंकुश शासन से तंग होकर गैरीबाल्डी का समर्थक बन गई थी । गैरीबाल्डी ने यहाँ विक्टर इमैनुएल के प्रतिनिधि के रूप में सत्ता संभाली । गैरीबाल्डी के दक्षिण अभियान का काबूर ने भी समर्थन किया ।

1862 ई. में गैरीबाल्डी ने रोम पर आक्रमण की योजना बनाई । काबूर ने गैरीबाल्डी के इस अभियान का विरोध करते हुए रोम की रक्षा के लिए पिडमौंट की सेना भेज दी । अभियान के बीच में ही गैरीबाल्डी की काबूर से भेंट हो गई तथा रोम अभियान वहीं खत्म हो गया । दक्षिणी इटली के जीते गए क्षेत्रों को गैरीबाल्डी ने विक्टर इमैनुएल को सौंप दिया ।

इस प्रकार, शेष जर्मनी का एकीकरण 1871 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय के नेतृत्व में पूरा हुआ ।

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