असहयोग आंदोलन प्रथम जनांदोलन था कैसे

असहयोग आंदोलन प्रथम जनांदोलन था कैसे ?

सितम्बर, 1920 में कलकत्ता में आयोजित विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन का निर्णय लिया गया । इसका नेतृत्व गाँधी जी ने किया । यह प्रथम जन-आंदोलन था । इस आंदोलन के मुख्यत: तीन कारण थे— खिलाफत का मुद्दा, पंजाब में सरकार की बर्बर कार्रवाइयों के विरुद्ध न्याय प्राप्त करना और अंतत: स्वराज्य की प्राप्ति करना ।

इस आंदोलन में दो तरह के कार्यक्रमों को अपनाया गया एक प्रस्तावित कार्यक्रम तथा दूसरा रचनात्मक कार्यक्रम । असहयोग आंदोलन के प्रस्तावित कार्यक्रम इस प्रकार थे—

(1)- सरकारी उपाधि एवं अवैतनिक सरकारी पदों को छोड़ दिया जाए ।

(2)- सरकारी तथा अर्द्धसरकारी उत्सवों का बहिष्कार किया जाए ।

(3)- स्थानीय संस्थाओं की सरकारी सदस्यता से इस्तीफा दिया जाए ।

(4)- सरकारी स्कूलों एवं कॉलेजों का बहिष्कार, वकीलों द्वारा न्यायालय का बहिष्कार किया जाए तथा आपसी विवाद पंचायती अदालतों द्वारा निबटाया जाए ।

(5)- असैनिक श्रमिक व कर्मचारी वर्ग मेसोपोटामिया में जाकर नौकरी करने से इनकार करें तथा विदेशी सामानों का पूर्णत: बहिष्कार करें ।

असहयोग आंदोलन के रचनात्मक कार्यक्रमों के अंतर्गत शराब का बहिष्कार, हिन्दू-मुस्लिम एकता एवं अहिंसा पर बल, छुआ-छूत से परहेज, स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग, हाथ से बुने खादी का प्रयोग, कड़े कानूनों के खिलाफ सविनय अवज्ञा करना, कर नहीं देना, राष्ट्रीय विद्यालय एवं कॉलेजों की स्थापना करना शामिल था ।

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